पाकिस्तान से गुजरात के मछुआरे का शव भारत पहुंचा, बेटा अब भी हिरासत में; 178 मछुआरों की रिहाई का इंतजार
गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के 48 वर्षीय मछुआरे बेजल भालिया का शव पाकिस्तान से भारत पहुंच गया है, लेकिन उनके परिवार को अभी पूरी राहत नहीं मिली है। भालिया के बेटे अश्विन अब भी पाकिस्तान की हिरासत में हैं। The Indian Express की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, बेजल का शव 18-19 सितंबर की रात उनके गांव कोब पहुंचा था।
बेजल और अश्विन को 2022 में कथित तौर पर पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों की सजा 16 मार्च 2022 को पूरी हो गई थी, लेकिन अश्विन की अब तक भारत वापसी नहीं हुई है।
पिता का शव घर लौटा, लेकिन बेटे की वापसी अब भी बाकी
बेजल भालिया के चार बेटों में से एक मंसिंह ने बताया कि परिवार ने पिता का अंतिम संस्कार कर दिया है, लेकिन कुछ पारिवारिक रस्में ऐसी हैं जिन्हें वे अश्विन की मौजूदगी में पूरा करना चाहते हैं। परिवार ने अश्विन की जल्द रिहाई और भारत वापसी की अपील की है।
भालिया परिवार मछली पकड़ने पर निर्भर है। परिवार के मुताबिक उनके पास थोड़ी जमीन भी है, लेकिन वह खारी होने के कारण बहुत उपजाऊ नहीं है। ऐसे परिवारों के लिए लंबे समय तक किसी सदस्य का विदेश की जेल में रहना केवल कानूनी या कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आजीविका से जुड़ा संकट भी बन जाता है।
178 मछुआरों का मामला क्यों फिर चर्चा में आया?
बेजल भालिया की मौत और उनके शव की वापसी ने पाकिस्तान की जेलों में बंद भारतीय मछुआरों के पुराने मुद्दे को फिर सामने ला दिया है।
23 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, 178 भारतीय मछुआरे ऐसे हैं जो पाकिस्तान की हिरासत में हैं और अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। अगस्त में मछुआरा संगठनों और परिवारों ने भी इसी आंकड़े का उल्लेख करते हुए दोनों देशों से उनकी रिहाई और प्रत्यावर्तन की मांग की थी।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। जुलाई 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच आधिकारिक रूप से साझा की गई कैदियों की सूची में पाकिस्तान ने 198 भारतीय या भारतीय माने जाने वाले मछुआरों को अपनी हिरासत में बताया था। उसी दौरान भारत सरकार ने 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई व प्रत्यावर्तन तेज करने का आग्रह किया था।
इसलिए 178 का आंकड़ा उन मछुआरों से जुड़ा है जिनकी सजा पूरी हो चुकी बताई गई है, जबकि 198 जुलाई की आधिकारिक सूची में पाकिस्तान की हिरासत में बताए गए भारतीय/भारतीय माने जाने वाले मछुआरों की कुल संख्या थी। दोनों आंकड़ों को एक ही अर्थ में इस्तेमाल करना सही नहीं होगा।
भारत-पाकिस्तान के बीच मछुआरे कैसे हिरासत में पहुंचते हैं?
भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा गुजरात के तट के सामने अरब सागर में काफी संवेदनशील क्षेत्र बनाती है। मछली पकड़ने के दौरान नावें कभी-कभी समुद्री सीमा पार कर दूसरे देश के जलक्षेत्र में चली जाती हैं। इसके बाद संबंधित देश की सुरक्षा एजेंसियां मछुआरों को हिरासत में ले सकती हैं।
मछुआरा परिवारों और संगठनों का कहना है कि कई मामलों में लोग अनजाने में समुद्री सीमा पार कर जाते हैं। अगस्त में गुजरात के परिवारों और मछुआरा संगठनों ने अहमदाबाद में दोनों सरकारों से उन मछुआरों की रिहाई की अपील की थी जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की हिरासत का कानूनी आधार और उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि अलग-अलग प्रक्रियाएं हो सकती हैं। इसलिए हर मामले को केवल “सीमा गलती से पार करने” के रूप में सामान्यीकृत करना उचित नहीं है।
2008 का Consular Access Agreement क्या कहता है?
भारत और पाकिस्तान के बीच 2008 का Agreement on Consular Access कैदियों से संबंधित एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यवस्था है। इसके तहत दोनों देश हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान करते हैं।
1 जुलाई 2026 को पाकिस्तान ने भारत को 52 नागरिक कैदियों और 198 मछुआरों की सूची सौंपी थी, जिन्हें भारतीय या भारतीय माने जाने वाले लोगों के रूप में दर्ज किया गया था। भारत ने भी पाकिस्तान से जुड़े कैदियों और मछुआरों की सूची साझा की।
भारत सरकार ने उसी अवसर पर पाकिस्तान से उन 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई और प्रत्यावर्तन में तेजी लाने को कहा था, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है।
बेजल भालिया की मौत ने चिंता क्यों बढ़ाई?
बेजल भालिया की मौत 27 अगस्त 2026 को पाकिस्तान की हिरासत में हुई थी। The Indian Express के अनुसार, वह उन भारतीय मछुआरों में शामिल थे जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली थी, लेकिन उनकी रिहाई नहीं हुई थी।
यह इस साल पाकिस्तान की हिरासत में गुजरात के किसी मछुआरे की मौत का दूसरा मामला बताया गया था। अगस्त में सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अगस्त को हुई इस मौत से पहले जनवरी में भी गुजरात के एक मछुआरे की पाकिस्तान की जेल में मौत हुई थी।
इस पृष्ठभूमि में मछुआरा परिवारों की चिंता केवल रिहाई तक सीमित नहीं है। वे हिरासत में मौजूद लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, कानूनी स्थिति और भारत वापसी की प्रक्रिया में तेजी की भी मांग करते रहे हैं।
परिवारों की मांग सिर्फ रिहाई नहीं, घर वापसी की है
अगस्त में गुजरात और दीव के मछुआरा परिवारों ने गांधीनगर में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर पाकिस्तान की जेलों में बंद अपने परिजनों की रिहाई के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी। The Indian Express के मुताबिक, इनमें ऐसे परिवार भी शामिल थे जिनके परिजन अपनी सजा पूरी करने के बाद भी पाकिस्तान की जेलों में बने हुए थे।
इन परिवारों के लिए हर दिन का इंतजार आर्थिक और सामाजिक दबाव भी बढ़ाता है। समुद्र में मछली पकड़ना कई परिवारों की मुख्य आजीविका है और परिवार के कमाने वाले सदस्य की लंबी अनुपस्थिति का असर सीधे घर की आय पर पड़ता है।
अब सबसे बड़ा सवाल: अश्विन और बाकी मछुआरे कब लौटेंगे?
बेजल भालिया का शव भारत पहुंच चुका है, लेकिन उनके बेटे अश्विन की रिहाई अभी परिवार की सबसे बड़ी चिंता है। इसी के साथ उन भारतीय मछुआरों का मुद्दा भी बना हुआ है जिनकी सजा पूरी होने के बावजूद वापसी नहीं हुई है।
जुलाई में जारी आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर पाकिस्तान की हिरासत में भारतीय या भारतीय माने जाने वाले 198 मछुआरों की सूची साझा की गई थी। इनमें से 178 के सजा पूरी कर लेने का दावा मछुआरा संगठनों ने अगस्त में किया था। इसलिए आगे की स्थिति समझने के लिए नई आधिकारिक कैदी सूची और दोनों देशों के बीच होने वाली प्रत्यावर्तन कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
बेजल भालिया का मामला एक परिवार की त्रासदी से आगे बढ़कर भारत-पाकिस्तान के बीच बंदी मछुआरों के मानवीय मुद्दे को सामने लाता है। परिवार अब अपने बचे हुए सदस्य की वापसी चाहता है—और यही मांग कई दूसरे गुजरात के मछुआरा परिवारों की भी है।
Key Facts
- बेजल भालिया: गिर सोमनाथ के 48 वर्षीय मछुआरे, जिनकी पाकिस्तान की हिरासत में 27 अगस्त को मौत हुई।
- शव भारत पहुंचा: उनका शव 18-19 सितंबर की रात गुजरात के गांव कोब पहुंचा।
- अश्विन भालिया: बेजल के बेटे, जो अब भी पाकिस्तान की हिरासत में हैं।
- 178 मछुआरे: अगस्त की रिपोर्टों में इतने भारतीय मछुआरों के सजा पूरी करने के बावजूद पाकिस्तान में हिरासत में होने की बात कही गई।
- 198 मछुआरे: जुलाई 2026 की आधिकारिक कैदी सूची में पाकिस्तान ने इतने भारतीय या भारतीय माने जाने वाले मछुआरों को अपनी हिरासत में बताया था।
- 2008 समझौता: भारत-पाकिस्तान के बीच Consular Access Agreement के तहत दोनों देश साल में दो बार कैदियों और मछुआरों की सूचियां साझा करते हैं।
Source: The Indian Express
What it supports: बेजल भालिया की पहचान, उनकी मौत, शव के गुजरात पहुंचने, बेटे अश्विन की पाकिस्तान में हिरासत और 178 सजा पूरी कर चुके भारतीय मछुआरों से जुड़ी मौजूदा स्थिति।
Source: Ministry of External Affairs, Government of India
What it supports: भारत-पाकिस्तान के बीच 1 जुलाई 2026 को कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान तथा भारतीय मछुआरों की रिहाई और प्रत्यावर्तन की मांग।
Source: India Today
What it supports: 198 भारतीय मछुआरों की हिरासत और उनमें 178 के सजा पूरी करने संबंधी मछुआरा संगठनों का दावा।
Source: Radio Pakistan
What it supports: 1 जुलाई 2026 को पाकिस्तान द्वारा 198 भारतीय/भारतीय माने जाने वाले मछुआरों की सूची साझा किए जाने की जानकारी।




