नई दिल्ली/बेंगलुरु: RummyCulture और उससे जुड़ी ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब ₹442.35 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की हैं। 25 सितंबर 2026 के इस अटैचमेंट ऑर्डर के बाद ED के मुताबिक मामले में अब तक अटैच, फ्रीज और जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹2,843 करोड़ हो गया है।
नई कार्रवाई में फिक्स्ड डिपॉजिट, कमर्शियल दुकानें, एक विला और कई रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं। ED के मुताबिक इनमें से कुछ संपत्तियां Gameskraft Technologies के शेयरधारकों के परिवारों, निजी फैमिली ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं के नाम पर हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ED की जांच RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियों की कथित गतिविधियों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर केंद्रित है।
महत्वपूर्ण: ED की ओर से लगाए गए आरोप अभी जांच का हिस्सा हैं। प्रोविजनल अटैचमेंट किसी व्यक्ति या कंपनी को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बराबर नहीं है।
नई ED कार्रवाई में ₹442 करोड़ की संपत्तियों में क्या शामिल है?
ED के 25 सितंबर के प्रोविजनल अटैचमेंट के मुताबिक करीब ₹442.35 करोड़ की संपत्तियों को PMLA के तहत अटैच किया गया है।
इनमें मुख्य रूप से:
- फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा रकम
- कमर्शियल दुकानें
- एक विला
- कई रिहायशी संपत्तियां
- शेयरधारकों के परिवारों से जुड़ी संपत्तियां
- निजी फैमिली ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं से जुड़ी संपत्तियां
शामिल हैं।
ED के अनुसार, यह कार्रवाई RummyCulture App & Others मामले में चल रही जांच का हिस्सा है।
₹2,843 करोड़ का आंकड़ा कैसे बना?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ₹2,843 करोड़ किसी एक दिन में अटैच की गई संपत्ति का मूल्य नहीं है। यह जांच के दौरान अलग-अलग चरणों में अटैच, फ्रीज और जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य है।
जुलाई 2026 में ED ने Gameskraft Technologies, उसके शेयरधारकों और संबंधित संस्थाओं की करीब ₹1,906 करोड़ की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की थीं। उस समय मामले में अटैच, फ्रीज और जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹2,401 करोड़ बताया गया था।
इसके बाद सितंबर में करीब ₹442.35 करोड़ की नई कार्रवाई हुई। ED के अनुसार अब कुल अटैच, फ्रीज और जब्त संपत्तियों का मूल्य लगभग ₹2,843 करोड़ है।
इसलिए ₹1,906 करोड़ और ₹442.35 करोड़ को सीधे जोड़कर ही ₹2,348.35 करोड़ बताना पूरे केस की कुल कार्रवाई नहीं दर्शाता, क्योंकि ₹2,401 करोड़ का जुलाई वाला आंकड़ा पहले की फ्रीज/जब्ती को भी शामिल करता था।
ED की जांच RummyCulture और Gameskraft तक कैसे पहुंची?
ED के मुताबिक जांच की शुरुआत तेलंगाना में दर्ज कई FIRs से हुई, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े कथित cheating offences शामिल थे। एजेंसी ने बाद में PMLA के तहत जांच शुरू की।
ED के अनुसार Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. और RummyTime Technologies Pvt. Ltd. ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म संचालित करते थे। इनमें RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे ऐप शामिल थे।
मई और जून 2026 में ED ने कंपनी के कार्यालयों और निदेशकों तथा प्रमुख कर्मचारियों के परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। मई की आधिकारिक ED प्रेस रिलीज के अनुसार उस कार्रवाई में बैंक बैलेंस, पेमेंट गेटवे बैलेंस, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और फिक्स्ड डिपॉजिट समेत करीब ₹526.49 करोड़ की चल संपत्तियां फ्रीज की गई थीं। साथ ही लगभग 2.30 किलोग्राम बुलियन/सोना/हीरे की ज्वेलरी और ₹11 लाख नकद जब्त किए गए थे।
ED ने BOT और गेमिंग सिस्टम को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
जांच के सबसे गंभीर हिस्सों में से एक BOTs यानी automated programmes/algorithms के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है।
ED का आरोप है कि प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को निष्पक्ष और automated players से मुक्त गेमिंग का भरोसा देते थे, लेकिन जांच में ऐसे BOTs के इस्तेमाल की बात सामने आई जो उपयोगकर्ताओं की जानकारी या सहमति के बिना उनके खिलाफ खेलते थे। एजेंसी का दावा है कि इससे कुछ उपयोगकर्ताओं को वित्तीय नुकसान हुआ और कंपनियों के लिए कथित अपराध से अर्जित आय बनी।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये ED के जांच संबंधी आरोप हैं, न कि इस रिपोर्ट के स्तर पर न्यायालय द्वारा स्थापित अंतिम तथ्य।
₹1,035 करोड़ के मार्केटिंग खर्च को लेकर भी ED का दावा
ED ने अपनी जांच में यह भी आरोप लगाया है कि कंपनियों ने करीब ₹1,035 करोड़ मार्केटिंग और प्रमोशनल गतिविधियों पर खर्च किए।
एजेंसी के अनुसार, इसमें बोनस, रेफरल इंसेंटिव, फ्री टूर्नामेंट एंट्री और अन्य प्रमोशनल रिवॉर्ड शामिल थे। ED का आरोप है कि इन रणनीतियों का इस्तेमाल नए उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने और मौजूदा उपयोगकर्ताओं को अधिक समय तक गेमिंग प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए किया गया।
ED ने कुछ मामलों में 5% से 10% तक withdrawal levy और withdrawable balance को non-withdrawable “Game Cash” में बदलने के लिए “Super Booster” जैसे ऑफर का भी आरोप लगाया है।
ED ने पैसों की कथित layering को कैसे बताया?
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित अपराध से अर्जित रकम को बाद में dividend payments और share buy-backs के जरिए शेयरधारकों तक पहुंचाया गया और इसके बाद विभिन्न वित्तीय साधनों तथा संपत्तियों में लगाया गया।
ED ने म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, convertible notes, equity shares, movable assets और महंगी अचल संपत्तियों का उल्लेख किया है। एजेंसी का दावा है कि इनमें से कुछ संपत्तियां फैमिली ट्रस्ट और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से रखी गई थीं।
₹19,984 करोड़ और ₹2,843 करोड़ में क्या अंतर है?
यह अंतर पाठकों के लिए खास तौर पर समझना जरूरी है।
जुलाई में दायर अपनी prosecution complaint के संदर्भ में ED ने FY2017-18 से 22 अगस्त 2025 तक commission के रूप में करीब ₹19,984 करोड़ के proceeds of crime का अनुमान बताया था। यह आंकड़ा कथित अपराध से उत्पन्न proceeds के अनुमान से संबंधित है।
दूसरी ओर, ₹2,843 करोड़ उन संपत्तियों का कुल मूल्य है जिन्हें जांच के दौरान ED के अनुसार attach, freeze या seize किया गया है।
इसलिए दोनों आंकड़े एक ही चीज को नहीं दर्शाते और इन्हें आपस में मिलाकर नहीं पढ़ना चाहिए।
मामले में कानूनी स्थिति क्या है?
ED ने जुलाई 2026 में Gameskraft Technologies, RummyTime Technologies और उनके संस्थापकों/निदेशकों के खिलाफ Bengaluru की Special Court में PMLA के तहत prosecution complaint दाखिल की थी। इसमें Vikas Taneja, Prithvi Raj Singh और Deepak Singh Ahlawat के नाम शामिल थे।
इससे पहले मई में इन तीन निदेशकों की गिरफ्तारी हुई थी। हालांकि Karnataka High Court ने 16 जून 2026 को उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए राहत दी थी। अदालत का फैसला गिरफ्तारी की वैधता से संबंधित था; इसे मौजूदा ED जांच या संपत्ति अटैचमेंट पर अंतिम दोषमुक्ति के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
इसलिए मौजूदा स्थिति को समझने का सही तरीका यह है कि PMLA जांच और संपत्ति अटैचमेंट जारी हैं, जबकि मामले से जुड़े आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया भी चल रही है।
अब आगे क्या होगा?
ED ने सितंबर की कार्रवाई के साथ साफ किया है कि जांच अभी जारी है। नई संपत्तियों का प्रोविजनल अटैचमेंट भी अंतिम जब्ती या दोषसिद्धि के समान नहीं है; आगे संबंधित कानूनी प्रक्रिया और जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।
मामले में आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ED की जांच से जुड़े आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और अटैच की गई संपत्तियों का अंतिम कानूनी status क्या होता है।
Key Facts
- नई कार्रवाई: ED ने करीब ₹442.35 करोड़ की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच कीं।
- अटैचमेंट ऑर्डर: यह कार्रवाई 25 सितंबर 2026 को PMLA के तहत की गई।
- कुल कार्रवाई: ED के अनुसार अटैच, फ्रीज और जब्त संपत्तियों का कुल मूल्य करीब ₹2,843 करोड़ है।
- संबंधित कंपनियां: Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies की जांच RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़ी है।
- ED के आरोप: एजेंसी ने BOTs, user-acquisition strategies और withdrawal restrictions समेत कई कथित तरीकों की जांच की है।
- अलग आंकड़ा: ED ने जुलाई में prosecution complaint के संदर्भ में कथित proceeds of crime का अनुमान करीब ₹19,984 करोड़ बताया था। यह ₹2,843 करोड़ की attached/frozen/seized assets से अलग आंकड़ा है।
- जांच: ED के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है।
Sources
Directorate of Enforcement
Business Standard
India Today
The Indian Express
Moneycontrol




