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UPI पर Supreme Court का बड़ा अपडेट: ₹2,000 से ऊपर MDR पर रोक से इनकार, सरकार से मांगा जवाब

UPI MDR Supreme Court: ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI merchant transactions पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 28 सितंबर को अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI से जवाब मांगा है। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी MDR को अंतिम रूप से सही या वैध घोषित नहीं किया है; फिलहाल चुनौती की सुनवाई जारी है।

नई व्यवस्था के तहत पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI transactions पर, जिनकी राशि ₹2,000 से अधिक है, 0.4% MDR प्रस्तावित है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। वहीं, Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान इस MDR के दायरे में नहीं हैं।

Key Facts

  • सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया है।
  • मामला ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M UPI transactions से जुड़ा है।
  • प्रस्तावित MDR की दर 0.4% है।
  • नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, RBI और NPCI समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
  • केंद्र के अनुसार UPI gateway के करीब 96% users MDR से exempt रहेंगे।
  • P2P UPI payments पर यह MDR लागू नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

28 सितंबर की सुनवाई में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र के MDR ढांचे को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। कोर्ट ने केंद्र से इस शुल्क की कानूनी और नियामकीय बुनियाद पर जवाब मांगा।

Business Standard के अनुसार, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि प्रस्तावित MDR टैक्स है या फीस और यदि यह दोनों नहीं है, तो इसे लागू करने का कानूनी आधार क्या है।

इसलिए मौजूदा स्थिति को “Supreme Court ने UPI MDR को मंजूरी दे दी” कहना सही नहीं होगा। कोर्ट ने फिलहाल केवल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है और मामले पर आगे सुनवाई होगी।

₹2,000 से ऊपर UPI पेमेंट पर क्या बदलेगा?

सरकार की नई व्यवस्था सभी UPI payments पर MDR नहीं लगाती। इसका दायरा चुनिंदा merchant payments तक सीमित है।

यानी यदि कोई ग्राहक किसी दुकान, कारोबारी या अन्य merchant को UPI से भुगतान करता है और वह पात्र transaction ₹2,000 से अधिक है, तो संबंधित payment ecosystem में MDR लागू हो सकता है। MDR मूल रूप से merchant-side payment ecosystem में transaction को facilitate करने वाली संस्थाओं के लिए शुल्क है।

इसके उलट, दो व्यक्तियों के बीच होने वाला UPI transfer—जैसे किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजना—इस MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा।

क्या ग्राहक से सीधे UPI चार्ज लिया जाएगा?

यहां सबसे महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

MDR merchant payment ecosystem में लगाया जाने वाला शुल्क है। केंद्र ने यह व्यवस्था इस तरह बनाई है कि इसे सीधे ग्राहक पर अलग UPI transaction fee के रूप में नहीं लगाया जाना है। Finance Ministry के अनुसार UPI application providers को platform fee या hidden charges लगाने की अनुमति नहीं होगी।

हालांकि, कारोबारियों पर आने वाली लागत और वे इसे अपने कारोबार में किस तरह absorb करते हैं, यह अलग सवाल है। इसी संभावित प्रभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में भी चिंता जताई गई है कि अतिरिक्त लागत का बोझ अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तक पहुंच सकता है। यह फिलहाल एक चिंता/संभावित प्रभाव है, कोई स्थापित तथ्य नहीं।

0.4% MDR कितना होगा?

प्रस्तावित MDR की दर 0.4% है। उदाहरण के लिए, यदि कोई पात्र merchant transaction ₹5,000 का है, तो 0.4% की गणना के आधार पर MDR ₹20 बनता है, हालांकि वास्तविक देय शुल्क पर लागू नियम, caps और transaction category भी महत्वपूर्ण होंगे।

सरकार के ढांचे में eligible transactions पर शुल्क की सीमा भी तय की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सामान्य 0.4% MDR पर ₹300 की अधिकतम सीमा रखी गई है। कुछ निर्दिष्ट क्षेत्रों के लिए अलग flat-rate व्यवस्था भी बताई गई है।

इसलिए केवल transaction amount देखकर हर मामले में एक समान शुल्क मान लेना सही नहीं होगा।

सरकार का तर्क क्या है?

केंद्र का तर्क है कि नई व्यवस्था UPI के merchant-payment ecosystem की आर्थिक sustainability से जुड़ी है। सरकार ने यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में UPI users इस MDR से exempt रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से यह बताया गया कि UPI gateway का करीब 96% user base प्रस्तावित charge से exempt रहेगा।

यह व्यवस्था करीब छह वर्षों से चले आ रहे zero-MDR framework में महत्वपूर्ण बदलाव है। Indian Express के अनुसार UPI पर zero-MDR protection जनवरी 2020 से लागू व्यवस्था का हिस्सा रहा है।

याचिका में क्या चुनौती दी गई है?

सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में केंद्र की 14 और 15 सितंबर 2026 की notifications को चुनौती दी गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि UPI transactions पर MDR की अनुमति देने के लिए सरकार के पास पर्याप्त वैधानिक आधार है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण पर याचिका को खारिज नहीं किया। इसके बजाय संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है और केंद्र को प्रस्तावित शुल्क की कानूनी स्थिति तथा आधार पर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।

RBI और NPCI भी मामले में क्यों महत्वपूर्ण हैं?

UPI ecosystem में RBI और NPCI की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इन संस्थाओं को भी मामले में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है।

अदालत के सामने अब केवल यह सवाल नहीं है कि MDR कितना होगा, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि इसे लागू करने का कानूनी आधार क्या है और payment ecosystem में इसकी संरचना किस तरह काम करेगी।

15 अक्टूबर से पहले क्या स्थिति रहेगी?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक नहीं लगाई है। सरकार द्वारा घोषित व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है, लेकिन साथ ही अदालत में इसकी कानूनी चुनौती जारी है।

इसका अर्थ है कि आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब मिलने के बाद अदालत इस मामले के कानूनी पहलुओं पर आगे विचार करेगी।

फिलहाल UPI users के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ₹2,000 से ऊपर का हर UPI payment chargeable नहीं है। प्रस्तावित MDR चुनिंदा merchant transactions पर लागू है, जबकि P2P UPI payments इस व्यवस्था से बाहर हैं।

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