गुजरात में बिजली की मांग 29,822 मेगावाट के रिकॉर्ड पर, त्योहारों के बीच सरकार ने बढ़ाई आपूर्ति की तैयारी

गुजरात में 16 अक्टूबर 2026 को बिजली की अधिकतम मांग 29,822 मेगावाट तक पहुंच गई, जो राज्य में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। त्योहारों के मौसम में बढ़ती खपत, औद्योगिक गतिविधियों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों के बीच कमजोर बारिश ने बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है। राज्य सरकार ने अतिरिक्त बिजली जुटाने और उपलब्ध आपूर्ति की समीक्षा के लिए कदम उठाए हैं।

Key Facts

  • रिकॉर्ड मांग: 16 अक्टूबर को गुजरात में अधिकतम बिजली मांग 29,822 मेगावाट दर्ज की गई।
  • पिछले साल से तुलना: अक्टूबर 2025 में इसी अवधि के लिए दर्ज 21,822 मेगावाट की तुलना में यह लगभग 36.6% अधिक है।
  • दैनिक खपत: 16 अक्टूबर को राज्य की बिजली खपत लगभग 574 मिलियन यूनिट बताई गई।
  • अतिरिक्त व्यवस्था: रिपोर्टों के अनुसार, राज्य ने केंद्रीय आवंटन और NTPC के फरक्का संयंत्र से 1,379 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की है।
  • आगे की योजना: सरकार ने अतिरिक्त बिजली स्रोतों और कोयले की उपलब्धता पर भी काम शुरू किया है।
  • नागरिकों से अपील: शाम के व्यस्त समय में गैर-जरूरी बिजली उपयोग कम रखने की अपील की गई है।

गर्मी के मौसम के बाद भी मांग इतनी ऊंची क्यों है?

गुजरात में बिजली की मांग आम तौर पर गर्मियों में अधिक रहती है, लेकिन इस बार अक्टूबर में ही रिकॉर्ड स्तर दर्ज होना ध्यान खींचता है। The Indian Express और The Times of India की रिपोर्टों के मुताबिक, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ त्योहारों से जुड़ी खपत ने मांग बढ़ाने में भूमिका निभाई। कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत भी अधिक बनी हुई है।

कम बारिश का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। कमजोर मानसून के कारण जलविद्युत उत्पादन पर दबाव और हवा की गति में कमी से पवन ऊर्जा उत्पादन प्रभावित होने की बात रिपोर्टों में कही गई है। जब कुछ स्रोतों से उपलब्ध बिजली घटती है और दूसरी ओर मांग बढ़ती है, तो बिजली व्यवस्था को संतुलित रखने के लिए अतिरिक्त स्रोतों और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन की जरूरत होती है।

29,822 मेगावाट का आंकड़ा क्या बताता है?

मेगावाट (MW) बिजली की तत्काल मांग या शक्ति की मात्रा मापने की इकाई है, जबकि मिलियन यूनिट (MU) एक अवधि में इस्तेमाल हुई बिजली की मात्रा बताती है। दोनों आंकड़े अलग-अलग चीजें दर्शाते हैं।

गुजरात की अधिकतम मांग 29,822 मेगावाट दर्ज होने के साथ 16 अक्टूबर की दैनिक खपत लगभग 574 मिलियन यूनिट बताई गई। DeshGujarat के अनुसार, अक्टूबर 2025 में दैनिक खपत 457 मिलियन यूनिट थी। यानी इस तुलना में दैनिक खपत करीब 27% बढ़ी।

यह अंतर समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि रिकॉर्ड अधिकतम मांग बिजली ग्रिड पर किसी समय की जरूरत को दर्शाती है, जबकि दैनिक खपत पूरे दिन में इस्तेमाल हुई बिजली का हिसाब देती है।

सरकार ने अतिरिक्त बिजली के लिए क्या कदम उठाए?

रिकॉर्ड मांग के बाद राज्य सरकार ने बिजली की उपलब्धता और आगामी जरूरतों की समीक्षा की। The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य ने केंद्रीय आवंटन और NTPC के फरक्का संयंत्र से 1,379 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जलविद्युत, गैस आधारित संयंत्रों और केंद्रीय स्रोतों से करीब 1,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली जुटाने की योजना पर काम किया जा रहा था।

इसके अलावा, अक्टूबर के लिए 2,990 मेगावाट की अल्पकालिक बिजली खरीद व्यवस्था किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई। अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना अहम होगा, खासकर तब जब औद्योगिक, घरेलू और कृषि जरूरतें एक साथ ऊंची बनी रहें।

ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल और राज्य मंत्री कौशिकभाई वेकरिया की अध्यक्षता में अधिकारियों तथा बिजली कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक भी हुई। The Times of India के अनुसार, अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से शाम 5 बजे से रात 11 बजे के बीच गैर-जरूरी बिजली उपयोग कम करने और संभव हो तो कुछ खपत दिन के समय करने की अपील की।

क्या बिजली कटौती की आशंका है?

रिकॉर्ड मांग अपने आप में यह साबित नहीं करती कि राज्यभर में बिजली कटौती होगी। आपूर्ति की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि उपलब्ध उत्पादन, केंद्रीय आवंटन, अतिरिक्त खरीद और ग्रिड प्रबंधन मिलकर मांग को कितना पूरा कर पाते हैं।

The Times of India की रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया कि उपभोक्ताओं को आपूर्ति बाधित होने को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति संबंधी चुनौतियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें भी सामने आई हैं। इसलिए राज्यभर में बिजली कटौती होने का कोई निश्चित दावा करना उपलब्ध जानकारी के आधार पर उचित नहीं होगा।

आगे गुजरात की बिजली व्यवस्था के लिए क्या मायने हैं?

इस रिकॉर्ड से संकेत मिलता है कि बिजली की अधिकतम मांग अब केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रह सकती। औद्योगिक विस्तार, कृषि सिंचाई, घरेलू खपत और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली जरूरतों के लिए राज्य को उत्पादन और खरीद की योजना पहले से तैयार रखनी होगी।

तात्कालिक अतिरिक्त खरीद से मौजूदा दबाव संभालने में मदद मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में उत्पादन क्षमता, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड प्रबंधन भी अहम होंगे। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था समय पर उपलब्ध हो और उपभोक्ताओं तक आपूर्ति बनाए रखी जा सके।

Sources

1. Source: The Indian Express

What it supports: रिकॉर्ड मांग, त्योहारों और कम बारिश से जुड़े कारक तथा अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था संबंधी रिपोर्ट।

2. Source: The Times of India

What it supports: समीक्षा बैठक, मांग में साल-दर-साल वृद्धि और शाम के समय बिजली बचाने की अपील।

3. Source: DeshGujarat

What it supports: 574 मिलियन यूनिट दैनिक खपत, पिछले वर्ष से तुलना और राज्य की अतिरिक्त बिजली व्यवस्था।