सूरत की हीरा इकाई बंद, कर्मचारियों के ₹10 लाख वेतन बकाया होने का दावा

गुजरात के सूरत शहर के वराछा इलाके में हीरा काटने और पॉलिश करने वाली इकाई मारुतिनंदन डायमंड्स बंद होने के बाद कर्मचारियों के बकाया वेतन का मामला सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, डायमंड वर्कर्स यूनियन गुजरात (DWUG) ने इकाई के मालिक किरीटभाई वागड़िया से संपर्क नहीं हो पाने के बाद पुलिस से शिकायत पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया। यूनियन के अनुसार, कुल ₹14.50 लाख के बकाया वेतन में से ₹4.50 लाख का भुगतान हुआ था, लेकिन शेष राशि देने का आश्वासन पूरा नहीं हुआ।

इस मामले में कर्मचारियों की मांग बकाया मेहनताना मिलने की है। हालांकि, पुलिस ने अभी बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही थी; उपलब्ध रिपोर्ट में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने की पुष्टि नहीं है।

दो महीने के वेतन का मामला कैसे सामने आया?

रिपोर्ट के मुताबिक, मारुतिनंदन डायमंड्स की इकाई इस महीने की शुरुआत में बंद हुई। वहां हीरे की कटिंग और पॉलिशिंग का काम होता था। यूनियन के अनुसार, इकाई में लगभग 55 कर्मचारी काम करते थे और कुछ कर्मचारियों को अगस्त तथा सितंबर का वेतन नहीं मिला था।

यूनियन के पदाधिकारी भावेश टांक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बकाया वेतन की कुल राशि ₹14.50 लाख बताई गई थी। उनके मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में ₹4.50 लाख का आंशिक भुगतान कराया गया और शेष रकम 19 अक्टूबर तक देने का आश्वासन मिला। यूनियन का कहना है कि तय समय पर भुगतान नहीं हुआ और बाद में मालिक से संपर्क करने की कोशिशें भी सफल नहीं रहीं।

इस तरह, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, आंशिक भुगतान के बाद करीब ₹10 लाख बकाया रहने का हिसाब बनता है। यह रकम यूनियन की ओर से बताई गई राशि पर आधारित है; स्वतंत्र रूप से सत्यापित वेतन रिकॉर्ड सार्वजनिक रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं हैं।

मालिक से संपर्क नहीं होने पर यूनियन ने पुलिस से क्या कहा?

यूनियन ने सूरत के अश्वनी कुमार पुलिस थाने में आवेदन देकर इकाई के मालिक के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने का अनुरोध किया। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कर्मचारियों के मालिक के घर पहुंचने पर घर बाहर से बंद मिला था और उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया गया। इन परिस्थितियों के आधार पर यूनियन ने पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की।

पुलिस निरीक्षक एच. बी. पटेल ने अखबार को बताया कि पुलिस मालिक से संपर्क करने की कोशिश कर रही थी और कुछ हीरा मजदूरों के बयान दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद अपराध दर्ज करने से संबंधित रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई होगी। इसलिए फिलहाल मालिक के खिलाफ आरोपों को सिद्ध तथ्य या दर्ज प्राथमिकी के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

कर्मचारियों पर क्या असर पड़ा?

बकाया वेतन से प्रभावित कर्मचारियों में से एक, मोनाबेन माली ने अखबार को बताया कि उन्हें अगस्त और सितंबर का कुल ₹60,000 वेतन नहीं मिला था। उन्होंने अपने परिवार के चिकित्सा खर्चों और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में हो रही कठिनाइयों का भी जिक्र किया। यह उनकी व्यक्तिगत स्थिति का विवरण है; इसे सभी कर्मचारियों की परिस्थितियों के समान नहीं माना जाना चाहिए।

हीरा कटिंग और पॉलिशिंग का काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समय पर वेतन मिलना परिवार के नियमित खर्चों का अहम आधार है। इकाई बंद होने और बकाया भुगतान में देरी से प्रभावित कर्मचारियों के सामने एक साथ आय और रोजगार की अनिश्चितता खड़ी हो सकती है।

अब मामले में आगे क्या होगा?

इस मामले में आगे की स्थिति पुलिस की जांच, कर्मचारियों के बयानों और वेतन संबंधी रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बकाया राशि की पुष्टि कैसे होती है और कर्मचारियों को शेष भुगतान कब मिलता है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि इकाई बंद होने, वेतन बकाया रहने और मालिक से संपर्क न हो पाने को लेकर यूनियन ने पुलिस से मदद मांगी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही निकाला जा सकता है।

मुख्य तथ्य

  • इकाई: मारुतिनंदन डायमंड्स, वराछा, सूरत।
  • काम: प्राकृतिक और प्रयोगशाला में तैयार हीरों की कटिंग व पॉलिशिंग।
  • कर्मचारी: रिपोर्ट के मुताबिक, इकाई में लगभग 55 कर्मचारी काम करते थे।
  • बकाया वेतन: यूनियन ने कुल ₹14.50 लाख बकाया होने की जानकारी दी; उसमें से ₹4.50 लाख भुगतान होने की बात कही गई।
  • पुलिस कार्रवाई: यूनियन ने आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की; उपलब्ध रिपोर्ट में FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं है।
  • अगला कदम: कर्मचारियों के बयान और पुलिस की आगे की कार्रवाई।

Sources

1. The Indian Express — सूरत की हीरा इकाई बंद होने और वेतन बकाया होने की रिपोर्ट

इकाई बंद होने, यूनियन की ओर से बताई गई बकाया राशि, आंशिक भुगतान और पुलिस के बयान का मुख्य स्रोत।

2. The Blunt Times — हीरा मजदूरों के बकाया वेतन पर रिपोर्ट

यह रिपोर्ट यूनियन की शिकायत, बकाया वेतन और पुलिस कार्रवाई की मांग से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देती है। हालांकि, FIR दर्ज होने की स्थिति पर दोनों रिपोर्टों में अंतर है; इसलिए लेख में FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं की गई है।