गुजरात के अहमदाबाद में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक समारोह में अनुसूचित जाति समुदाय के 44 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया। नवा वाडज क्षेत्र में हुए इस कार्यक्रम में राज्य के आठ जिलों से लोग पहुंचे थे। आयोजकों के मुताबिक, यह समारोह अशोक विजयादशमी के अवसर पर आयोजित किया गया था। प्रतिभागियों में नाबालिग भी शामिल थे।
नवा वाडज में हुआ समारोह, आठ जिलों के लोग हुए शामिल
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम का आयोजन लोटस बौद्ध संघ ट्रस्ट ने किया था। बौद्ध दीक्षा लेने वाले लोग अहमदाबाद के अलावा वडोदरा, गांधीनगर, मेहसाणा, राजकोट, सुरेंद्रनगर, साबरकांठा और पाटन जिलों से आए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, दीक्षा लेने वाले 44 लोगों में 10 नाबालिग थे और छह परिवार भी शामिल थे। समारोह का संचालन सुरेंद्रनगर स्थित अमर बौद्ध विहार के भंते पथिक श्रेष्ठी ने किया।
कुछ प्रतिभागियों के लिए यह फैसला व्यक्तिगत आस्था और समानता से जुड़ा
रिपोर्ट में अहमदाबाद के लेखक और ट्रेड यूनियन नेता आनंद परमार का भी उल्लेख है। उन्होंने समारोह में बौद्ध धर्म अपनाया। परमार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से लंबे समय से प्रभावित रहे हैं और आंबेडकर से संबंधित पुस्तकों का हिंदी से गुजराती में अनुवाद भी कर चुके हैं
समारोह में शामिल 26 वर्षीय रितेश सोलंकी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अपने निर्णय को जाति-आधारित व्यवस्था में अधिकारों और सामाजिक असमानता से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि शहरों में स्थिति बेहतर होने के बावजूद गांवों में सामाजिक अन्याय बना हुआ है। यह उनका व्यक्तिगत अनुभव और विचार है; इसे समारोह में शामिल सभी लोगों की वजह नहीं माना जाना चाहिए।
अशोक विजयादशमी और डॉ. आंबेडकर की विरासत का क्या संबंध है?
अशोक विजयादशमी बौद्ध समुदाय के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखती है। डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बौद्ध धर्म अपनाया था। उनके इस कदम का संबंध जातिगत भेदभाव के विरोध और समानता के विचारों से जोड़ा जाता है।
अहमदाबाद में हुआ समारोह भी इसी अवसर पर आयोजित किया गया। हालांकि, सभी प्रतिभागियों के व्यक्तिगत कारण एक जैसे थे, ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए उपलब्ध रिपोर्ट में पर्याप्त जानकारी नहीं है।
गुजरात में धर्म परिवर्तन के लिए क्या कानूनी प्रक्रिया है?
गुजरात में धर्म परिवर्तन से संबंधित प्रावधान गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2003 और उससे जुड़े नियमों में दिए गए हैं। अधिनियम की धारा 5 में प्रस्तावित धर्म परिवर्तन के संबंध में संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से पूर्व अनुमति लेने और धर्म परिवर्तन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत सूचना देने का प्रावधान है।
समारोह के आयोजक ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया अधिनियम और 2008 के नियमों के अनुसार पूरी की गई। यह आयोजक का बयान है; उपलब्ध रिपोर्ट में प्रत्येक प्रतिभागी की प्रशासनिक प्रक्रिया का अलग-अलग विवरण प्रकाशित नहीं किया गया है।
एक दिन पहले भी अहमदाबाद में हुआ था बौद्ध दीक्षा कार्यक्रम
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अहमदाबाद के गीता मंदिर क्षेत्र के पास आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में दलित समुदाय के 76 लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया था। यह नवा वाडज में हुए 44 लोगों के समारोह से अलग कार्यक्रम था।
दोनों घटनाएं शहर में लगातार दो दिनों में हुईं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन्हें एक ही आयोजन या एक साझा आधिकारिक अभियान का हिस्सा नहीं कहा जा सकता।
मुख्य तथ्य
- स्थान: नवा वाडज, अहमदाबाद
- तारीख: बुधवार, 21 अक्टूबर 2026
- बौद्ध धर्म अपनाने वाले: 44 लोग
- प्रतिभागियों के जिले: अहमदाबाद, वडोदरा, गांधीनगर, मेहसाणा, राजकोट, सुरेंद्रनगर, साबरकांठा और पाटन
- नाबालिग: रिपोर्ट के अनुसार 10
- आयोजक: लोटस बौद्ध संघ ट्रस्ट
- अवसर: अशोक विजयादशमी
ये विवरण द इंडियन एक्सप्रेस की प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित हैं।


