कच्छ की मोहम्मदी मस्जिद के विध्वंस पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर से 19 अक्टूबर तक जवाब तलब

गुजरात हाईकोर्ट ने कच्छ जिले के भुज क्षेत्र में मोहम्मदी मस्जिद के विध्वंस को चुनौती देने वाली याचिका पर जिला कलेक्टर से जवाब मांगा है। अदालत ने कलेक्टर को 19 अक्टूबर 2026 तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 22 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मस्जिद के प्रबंधन पक्ष को सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़े नोटिस का प्रभावी जवाब देने और आदेश को चुनौती देने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।

Key Facts

  • मामला: मोहम्मदी मस्जिद के विध्वंस को चुनौती देने वाली याचिका।
  • स्थान: भुज क्षेत्र, कच्छ जिला, गुजरात।
  • अदालत: गुजरात हाईकोर्ट।
  • हलफनामे की समय-सीमा: 19 अक्टूबर 2026।
  • अगली सुनवाई: 22 अक्टूबर 2026।
  • याचिकाकर्ता की मांगें: विध्वंस आदेश रद्द करना, मस्जिद की बहाली, मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
  • अदालत की मौजूदा स्थिति: हाईकोर्ट ने फिलहाल विध्वंस की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।

नोटिस, जवाब और विध्वंस के बीच क्या हुआ?

मामले का प्रमुख सवाल प्रशासनिक कार्रवाई के क्रम और याचिकाकर्ता को उपलब्ध समय को लेकर है। इंडियन एक्सप्रेस और अहमदाबाद मिरर की रिपोर्टों के अनुसार, भुज (ग्रामीण) के मामलतदार ने 18 जून 2026 को गुजरात भूमि राजस्व संहिता की धारा 61 के तहत कथित अतिक्रमण को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। याचिका के मुताबिक, यह नोटिस मस्जिद प्रबंधन को 19 जून को दोपहर करीब 1 बजे मिला।

याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रबंधन ने 20 जून को अपना जवाब और संबंधित सामग्री प्रस्तुत कर दी थी। लेकिन उसके अनुसार, अतिक्रमण से जुड़ा आदेश 19 जून की तारीख का था और मस्जिद का ढांचा 21 जून की सुबह गिरा दिया गया। याचिका में इसी समय-क्रम को चुनौती दी गई है।

यह घटनाक्रम याचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी सवाल को सामने लाता है: क्या मस्जिद के प्रबंधन को अपना पक्ष रखने और प्रशासनिक आदेश को चुनौती देने का पर्याप्त अवसर दिया गया था? इस प्रश्न पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगे की सुनवाई और रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही निकलेगा।

मस्जिद प्रबंधन ने अदालत से क्या मांगा है?

मोहम्मदी मस्जिद जमात की ओर से उसके ट्रस्टी और मुतवल्ली सिद्दीक तेजमल समा ने याचिका दायर की है। याचिका में प्रशासन की कार्रवाई को अवैध, मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई है। ये याचिकाकर्ता के आरोप और दलीलें हैं, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य नहीं।

याचिका में मुख्य रूप से ये राहतें मांगी गई हैं:

  • मामलतदार के अतिक्रमण संबंधी आदेश को रद्द किया जाए।
  • मस्जिद को उसके पूर्व स्थान और स्थिति में बहाल किया जाए।
  • विध्वंस के लिए मुआवजा दिया जाए।
  • कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या कानूनी कदम उठाए जाएं।
  • मामले के लंबित रहने के दौरान विवादित स्थल पर तीसरे पक्ष के अधिकार बनाने या स्थायी बदलाव करने से रोका जाए।

इन मांगों पर अभी अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए मस्जिद की बहाली, मुआवजे या अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को अदालत द्वारा मंजूर राहत के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने अभी क्या निर्देश दिया है—और क्या तय नहीं किया?

13 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति निरल आर. मेहता ने कच्छ के जिला कलेक्टर को 19 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले को 22 अक्टूबर को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया।

अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट ने विध्वंस को वैध या अवैध घोषित नहीं किया है। कलेक्टर से जवाब मांगना इस चरण में प्रशासन का पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने लाने की प्रक्रिया है। इसे याचिकाकर्ता की सभी दलीलों की न्यायिक स्वीकृति नहीं माना जाना चाहिए।

अगली सुनवाई में कलेक्टर के हलफनामे और मामले से जुड़े रिकॉर्ड पर आगे विचार हो सकता है। अदालत का अगला आदेश ही बताएगा कि इस विवाद में आगे कौन-से कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

22 अक्टूबर की सुनवाई क्यों अहम है?

इस मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव कलेक्टर का हलफनामा और 22 अक्टूबर की सुनवाई है। याचिका में नोटिस मिलने, जवाब दाखिल करने और विध्वंस आदेश की तारीखों को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उन पर प्रशासन का पक्ष सामने आना आगे की न्यायिक समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल, इस विवाद को लेकर दो बातों में अंतर रखना जरूरी है: मस्जिद प्रबंधन ने कार्रवाई की प्रक्रिया को चुनौती दी है, जबकि अदालत ने प्रशासन से जवाब मांगा है। विध्वंस की वैधता और याचिका में मांगी गई राहतों पर अंतिम स्थिति अदालत के आगे के आदेशों से ही स्पष्ट होगी।

स्थिति अपडेट: यह रिपोर्ट 14 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। मामले की अगली निर्धारित सुनवाई 22 अक्टूबर 2026 है। सुनवाई से पहले या उसके दौरान कोई नया आदेश जारी होने पर स्थिति बदल सकती है।

Sources