अहमदाबाद के पीराना में 80 घंटे बाद भी बच्ची का सुराग नहीं, मीथेन गैस और जहरीली गाद बनी बाधा

गुजरात के अहमदाबाद में पीराना डंपिंग यार्ड के पास खुले ड्रेनेज में गिरी दृष्टिबाधित बच्ची की तलाश 80 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी जारी है। विषैली गैस, रासायनिक अपशिष्ट मिला पानी और भारी गाद बचाव दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां बन गए हैं। बोरवेल में इस्तेमाल होने वाले निरीक्षण कैमरों और ड्रेनेज के मैनहोल में CCTV जांच के बावजूद बच्ची का पता नहीं चल सका है। अब तलाशी नाले के साथ पीराना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और साबरमती नदी के आसपास भी की जा रही है।

Key Facts

  • स्थान: पीराना डंपिंग यार्ड के पास, विशाला–नारोल रोड क्षेत्र, अहमदाबाद।
  • घटना: बच्ची खुले ड्रेनेज में गिर गई थी; घटना शनिवार, 10 अक्टूबर को हुई।
  • तलाशी: 14 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, अभियान 80 घंटे से अधिक समय से जारी था।
  • मुख्य बाधाएं: मीथेन गैस, रासायनिक अपशिष्ट मिला पानी और भारी गाद।
  • कैमरों से सुराग नहीं: बोरवेल निरीक्षण कैमरों और आसपास के मैनहोल में CCTV जांच से बच्ची का पता नहीं चला।
  • तलाशी का दायरा: ड्रेनेज नेटवर्क के साथ पीराना STP और साबरमती नदी के आसपास भी जांच की जा रही है। Vibes Of India+1

80 घंटे बाद भी तलाश जारी, लेकिन बच्ची कहां है?

पीराना के पास जिस ड्रेनेज लाइन में बच्ची गिरी, वह गहरी मुख्य निकासी लाइन है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसकी गहराई लगभग 35 से 40 फीट बताई गई है। अंदर पानी का लगातार बहाव और खतरनाक परिस्थितियां बचावकर्मियों के लिए नीचे जाकर तलाशी लेना मुश्किल बना रही हैं।

अहमदाबाद फायर विभाग और नगर निगम के इंजीनियरिंग दल लगातार खोज अभियान में जुटे हैं। लेकिन अब तक उपलब्ध रिपोर्टों में बच्ची की स्थिति या उसके सटीक स्थान की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए तलाशी के दौरान सामने आ रही संभावनाओं को बच्ची की वास्तविक स्थिति नहीं माना जा सकता।

कैमरे भी क्यों नहीं दे पाए कोई सुराग?

बच्ची का पता लगाने के लिए बचाव दल ने बोरवेल में इस्तेमाल होने वाले विशेष निरीक्षण कैमरों को ड्रेनेज के भीतर उतारा। नगर निगम की टीम ने आसपास के मैनहोल में भी CCTV कैमरों से जांच की। इन प्रयासों से कोई स्पष्ट दृश्य या ऐसा संकेत नहीं मिला, जिससे बच्ची का स्थान तय किया जा सके।

रिपोर्टों के अनुसार, अंदर जमा गाद और हिल चुके मलबे के कारण दृश्यता बेहद कम रही। अब भारी मशीनों की मदद से गाद निकालने की कोशिश की जा रही है, ताकि ड्रेनेज के भीतर आगे की जांच के लिए रास्ता साफ हो सके।

यह केवल तकनीकी चुनौती नहीं है। जब कैमरे से दृश्य साफ न मिले और अंदर उतरना भी जोखिम भरा हो, तो बचाव दल को हर अगले कदम पर सुरक्षा और तलाशी की जरूरत के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।

मीथेन गैस और रासायनिक पानी ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव अभियान में दूसरी बड़ी बाधा ड्रेनेज के भीतर मौजूद गैस और रासायनिक अपशिष्ट मिला पानी है। रिपोर्टों में मीथेन गैस, लगातार बहते औद्योगिक अपशिष्ट और भारी गाद का उल्लेख है। इन परिस्थितियों में बचावकर्मियों के लिए मुख्य ड्रेनेज लाइन में गहराई तक उतरकर तलाशी लेना कठिन हो गया है।

नगर निगम के इंजीनियरिंग अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, इस मुख्य लाइन में नरोडा की ओर से आने वाला पानी और अहमदाबाद के उत्तर, दक्षिण तथा पूर्वी क्षेत्रों से आने वाला ड्रेनेज प्रवाह भी जुड़ता है।

रासायनिक पानी के स्रोत को लेकर अनधिकृत औद्योगिक कनेक्शन या टैंकरों से अपशिष्ट छोड़े जाने की आशंका जताई गई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इसके वास्तविक स्रोत की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य के बजाय जांच के लिए सामने आई संभावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

तलाशी अब पीराना STP और साबरमती नदी तक

ड्रेनेज के अंदर तलाशी के साथ बचाव दल पीराना सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और साबरमती नदी के आसपास भी खोज कर रहे हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, नदी में नावों की मदद से और किनारों पर पैदल तलाशी ली गई है। STP के इनलेट क्षेत्र और नदी के नीचे की ओर पड़ने वाले हिस्सों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

इन इलाकों में खोज का उद्देश्य ड्रेनेज के पानी के बहाव से जुड़े संभावित रास्तों की जांच करना है। लेकिन अब तक उपलब्ध जानकारी में इन प्रयासों से भी बच्ची का पता चलने की पुष्टि नहीं हुई है।

बच्ची की उम्र को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अंतर

इस घटना पर प्रकाशित खबरों में बच्ची की उम्र को लेकर एक अंतर दिखाई देता है। 11 अक्टूबर की कुछ शुरुआती रिपोर्टों में उम्र 9 वर्ष बताई गई थी, जबकि 13 और 14 अक्टूबर की बाद की रिपोर्टों में उसे 10 वर्षीय बच्ची बताया गया। इस लेख में नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर 10 वर्ष की उम्र का उल्लेख किया गया है।

अब आगे किस पर रहेगी नजर?

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि तलाशी जारी है, लेकिन बच्ची की स्थिति और स्थान की पुष्टि नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई में ड्रेनेज से गाद हटाने, सुरक्षित तरीके से अंदरूनी हिस्सों की जांच करने और STP तथा साबरमती नदी के आसपास खोज जारी रखने पर ध्यान है।

यह मामला खुले ड्रेनेज और दूषित पानी से जुड़े सार्वजनिक सुरक्षा जोखिमों की ओर भी ध्यान खींचता है। हालांकि, जिम्मेदारी या संभावित लापरवाही पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए आधिकारिक जांच और पुष्ट जानकारी जरूरी होगी।

स्थिति संबंधी नोट: यह रिपोर्ट 14 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। बचाव अभियान जारी रहने के दौरान स्थिति बदल सकती है; बच्ची की बरामदगी या किसी नए आधिकारिक घटनाक्रम की पुष्टि उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली।

Sources