US-Iran Conflict के बीच Strait of Hormuz में commercial shipping की गतिविधियां सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई हैं। Reuters के अनुसार 17 सितंबर को इस रणनीतिक जलमार्ग से सिर्फ चार commodity vessels गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत करीब 16 जहाज प्रतिदिन था। इसी बीच 22 सितंबर से New York में संयुक्त राष्ट्र महासभा की General Debate शुरू होने जा रही है, जहां संघर्ष, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे।
इस संकट का असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं है। Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग है और मौजूदा व्यवधान ने तेल, गैस, shipping costs और आयात पर दबाव बढ़ाया है। भारत के लिए यह मुद्दा खास महत्व रखता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।
Hormuz से जहाजों की आवाजाही कितनी घट गई?
Reuters के मुताबिक 17 सितंबर को Strait of Hormuz से केवल चार commercial vessels गुजरे। इनमें दो जहाज प्रवेश कर रहे थे और दो बाहर निकले। इसके मुकाबले 10 दिनों का औसत करीब 18 vessels था। कुछ जहाजों के Automatic Identification System (AIS) transponders बंद होने की संभावना भी बताई गई है, इसलिए उपलब्ध आंकड़े वास्तविक traffic का पूरा चित्र नहीं दे सकते।
18 सितंबर को भी स्थिति में बड़ा सुधार दिखाई नहीं दिया। Reuters के अनुसार गुरुवार को सिर्फ चार commodity vessels ने Hormuz पार किया, जबकि 10-दिन का औसत 16 था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि Red Sea के Bab el-Mandeb route पर भी traffic सामान्य औसत से थोड़ा नीचे रहा।
यानी फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण संकेत सिर्फ जहाजों की संख्या नहीं, बल्कि यह है कि व्यापारिक जहाज conflict zone से गुजरने को लेकर अतिरिक्त जोखिम और लागत का सामना कर रहे हैं।
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव क्यों बढ़ा?
Hormuz में व्यवधान का सीधा संबंध वैश्विक energy markets से है। U.S. Energy Information Administration के आंकड़ों के अनुसार 2026 की दूसरी तिमाही में Strait of Hormuz से oil flows औसतन करीब 4.9 million barrels per day रहे, जबकि 2025 की समान तिमाही में यह आंकड़ा करीब 21 million barrels per day था।
हालांकि 18 सितंबर को तेल की कीमतों में कुछ राहत दिखाई दी। Reuters के अनुसार Brent crude करीब 2% गिरकर $102.53 प्रति barrel और U.S. West Texas Intermediate करीब 2% गिरकर $100.04 प्रति barrel पर आया। Saudi Arabia की supply व्यवस्था में कुछ सुधार की उम्मीद ने बाजार की चिंता को कुछ कम किया, लेकिन कीमतें अभी भी $100 के आसपास बनी हुई हैं।
इससे स्पष्ट है कि बाजार में दो विपरीत प्रभाव साथ-साथ काम कर रहे हैं—एक तरफ supply disruption का जोखिम है, जबकि दूसरी तरफ वैकल्पिक routes और Saudi supply adjustments कुछ दबाव कम कर रहे हैं।
Saudi Arabia और Red Sea की स्थिति ने संकट को और जटिल किया
Strait of Hormuz अकेला maritime pressure point नहीं है। Yemen में Iran-backed Houthi forces की गतिविधियों और Red Sea क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैकल्पिक shipping routes पर भी जोखिम बढ़ाया है। Reuters के अनुसार Saudi Arabia ने Red Sea के Yanbu export hub को प्रभावित करने वाली घटनाओं के बाद Gulf crude की कुछ मात्रा को ship-to-ship transfers के जरिए बाहर भेजने की व्यवस्था बढ़ाई है।
Reuters के अनुसार Saudi Aramco सितंबर और अक्टूबर में Ras Tanura से लगभग 60 million barrels crude को Oman के Sohar में ship-to-ship transfers के जरिए export करने की योजना बना रही है, हालांकि यह जानकारी trading sources पर आधारित है और Aramco ने इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
यह वैकल्पिक व्यवस्था supply को पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं लाती, लेकिन इससे कुछ Gulf crude को प्रभावित maritime routes से बाहर निकालने की कोशिश दिखाई देती है।
भारत के लिए यह संकट क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत के लिए West Asia conflict का असर तेल की कीमतों और shipping costs दोनों के जरिए दिखाई दे सकता है। Indian Express के अनुसार भारत अपनी crude oil requirement का 88% से अधिक आयात करता है और सितंबर में Brent crude के $100/barrel से ऊपर जाने ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित दबाव को फिर चर्चा में ला दिया है।
Shipping costs भी बढ़े हैं। Hindustan Times ने 14 सितंबर को रिपोर्ट किया था कि भारत आने वाले tankers की daily charter rates लगभग दो सप्ताह में बढ़कर करीब $250,000 हो गई थीं, जो पहले लगभग $100,000 थीं। रिपोर्ट के अनुसार bunker fuel और insurance costs में भी वृद्धि हुई।
LPG supply में भी बदलाव देखने को मिला है। Indian Express के अनुसार पिछले छह महीनों में भारत के LPG imports में U.S. की हिस्सेदारी 50% से ऊपर चली गई, जबकि conflict से पहले के छह महीनों में यह 10% से कम थी। रिपोर्ट ने इसे West Asia से LPG supply में व्यवधान के बाद sourcing में आए बदलाव से जोड़ा।
भारतीय crew और shipping safety भी बड़ी चिंता
18 सितंबर को Hindustan Times ने रिपोर्ट किया कि Strait of Hormuz के आसपास दो foreign-flagged vessels पर हमले की घटनाओं में भारतीय crew सदस्य भी मौजूद थे। एक मामले में Panama-flagged crude tanker M.T. Basrah Energy को projectile से नुकसान की सूचना मिली, लेकिन vessel पर मौजूद 22 crew members, जिनमें 14 भारतीय थे, सुरक्षित बताए गए। दूसरे vessel के मामले में उस समय विस्तृत जानकारी का इंतजार था।
भारत का Directorate General of Shipping पहले से ही Persian Gulf, Strait of Hormuz और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में भारतीय seafarers के लिए heightened vigilance और security measures की सलाह जारी कर चुका है। मार्च 2026 की advisory में voyage-specific risk assessment, continuous monitoring और emergency communication mechanisms पर जोर दिया गया था।
इसलिए भारत के लिए यह संकट केवल crude oil की कीमतों का सवाल नहीं है; merchant shipping, Indian seafarers और supply-chain security भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
Trump के UN पहुंचने से पहले क्या मुद्दे सबसे अहम रहेंगे?
संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं session की General Debate 22 से 28 सितंबर 2026 तक New York में होगी। UN के अनुसार इस दौरान दुनिया भर के Heads of State and Government तथा अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।
Reuters ने 18 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में कहा कि President Donald Trump के UN में पहुंचने के समय U.S.-Iran conflict, regional security और shipping routes से जुड़े सवाल प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में रहेंगे।
इसी बीच Reuters ने 17 सितंबर को रिपोर्ट किया कि अमेरिकी प्रशासन ने Iranian President Masoud Pezeshkian और Foreign Minister Abbas Araqchi समेत शीर्ष Iranian officials को UN General Assembly में शामिल होने की अनुमति देने का फैसला किया है। यह फैसला ongoing conflict के बावजूद UN diplomatic participation से जुड़े अमेरिकी दायित्वों के संदर्भ में लिया गया है।
इससे आने वाले दिनों में UN मंच पर युद्ध, maritime security, energy flows और आगे की diplomacy पर बातचीत का महत्व बढ़ सकता है। हालांकि किसी संभावित diplomatic outcome को अभी निश्चित मानना उचित नहीं होगा।
अभी सबसे बड़ी चिंता क्या है—तेल, shipping या regional security?
मौजूदा स्थिति में ये तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
Hormuz में shipping कम होने से energy supplies पर जोखिम बढ़ता है। Energy risk बढ़ने पर crude और LNG की कीमतों पर दबाव आ सकता है। महंगी shipping और insurance लागत से भारत जैसे import-dependent देशों के लिए landed energy costs बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर Saudi Arabia जैसे producers द्वारा alternative export arrangements और supply adjustments बाजार पर कुछ दबाव कम कर सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि conflict के बीच maritime traffic के आंकड़े तेजी से बदल रहे हैं और कुछ vessels AIS बंद करके भी transit कर सकते हैं। इसलिए किसी एक दिन के ship-count को पूरे supply situation का अंतिम संकेत नहीं माना जाना चाहिए।
अब आगे किन घटनाओं पर नजर रहेगी?
आने वाले दिनों में तीन developments खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेंगे—Strait of Hormuz से commercial shipping की स्थिति, Gulf और Red Sea में maritime security तथा UN General Debate में U.S. और Iran से जुड़े कूटनीतिक संदेश।
UN General Debate 22 सितंबर से शुरू हो रही है। इस दौरान किसी ceasefire, negotiations या maritime arrangements को लेकर नई घोषणा होती है तो उसका असर energy markets और global shipping पर भी पड़ सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई निश्चित diplomatic outcome घोषित नहीं हुआ है।
Key Facts
- Strait of Hormuz से 17 सितंबर को केवल 4 commercial vessels गुजरे; 10-दिन का औसत करीब 18 था।
- 18 सितंबर को भी Hormuz traffic करीब 4 commodity vessels तक सीमित रहा।
- 18 सितंबर को Brent crude करीब $102.53/barrel पर रहा, जबकि WTI करीब $100.04/barrel पर था।
- भारत crude oil requirement का 88% से अधिक आयात करता है, इसलिए prolonged energy disruption भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- 18 सितंबर को Strait of Hormuz क्षेत्र में भारतीय crew वाले foreign-flagged vessels से जुड़ी दो attack incidents की रिपोर्ट सामने आई।
- UN General Assembly की 81वीं session की General Debate 22–28 सितंबर 2026 को New York में होगी।
Sources
- Reuters — Strait of Hormuz shipping traffic
- Reuters — US-Iran conflict and Trump at the UN
- United Nations — 81st General Assembly General Debate
- U.S. Energy Information Administration — Strait of Hormuz energy flows
- Hindustan Times — Indian crew and vessels near Strait of Hormuz
- Indian Express — Brent crude and impact on India




