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RBI का बड़ा फैसला: ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचेगा रिजर्व बैंक, जानिए क्यों लिया गया यह कदम

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी यानी surplus liquidity को कम करने के लिए ₹1 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का फैसला किया है। यह बिक्री Open Market Operations (OMO) के जरिए की जाएगी।

RBI के अनुसार, यह OMO बिक्री तीन चरणों में होगी। पहला चरण 17 सितंबर 2026 को ₹50,000 करोड़ का होगा। इसके बाद 21 सितंबर को ₹25,000 करोड़ और 28 सितंबर को ₹25,000 करोड़ की बिक्री की जाएगी। कुल मिलाकर RBI ₹1 लाख करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियां बेचेगा।

क्यों लिया RBI ने यह फैसला?

हाल के दिनों में भारतीय बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता काफी बढ़ गई है। Reuters के अनुसार, विशेष विदेशी मुद्रा जुटाव योजना के तहत बैंकों से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जमा आने के बाद सिस्टम में रुपये की liquidity बढ़ी। सितंबर में surplus liquidity करीब ₹10 लाख करोड़ से अधिक रही।

इतनी अधिक liquidity के कारण overnight money-market rates पर दबाव पड़ा और वे RBI के policy corridor के निचले स्तर तक चले गए। ऐसे में केंद्रीय बैंक liquidity को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रहा है।

तीन चरणों में होगी बॉन्ड बिक्री

RBI की घोषित योजना के मुताबिक:

  • 17 सितंबर 2026: ₹50,000 करोड़
  • 21 सितंबर 2026: ₹25,000 करोड़
  • 28 सितंबर 2026: ₹25,000 करोड़
  • कुल: ₹1 लाख करोड़

यह प्रक्रिया Open Market Operations के तहत सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री के माध्यम से होगी।

इसका बाजार पर क्या असर हो सकता है?

सरकारी बॉन्ड की बड़ी बिक्री से बाजार में बॉन्ड की supply बढ़ सकती है। इससे bond yields पर दबाव बढ़ने की संभावना है। Reuters के अनुसार, RBI के इस कदम की घोषणा के बाद भारतीय सरकारी बॉन्ड yields में बढ़ोतरी देखी गई और 10-year benchmark yield 7% के ऊपर चली गई।

हालांकि, इसका आम लोगों पर तत्काल सीधा असर जरूरी नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य फिलहाल बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त liquidity को नियंत्रित करना और money-market conditions को RBI की monetary policy के अनुरूप बनाए रखना है।

RBI के लिए यह कदम क्यों महत्वपूर्ण है?

RBI पहले भी liquidity management के लिए VRRR और foreign-exchange swaps जैसे उपायों का इस्तेमाल कर चुका है। लेकिन इन उपायों से अपेक्षित मात्रा में liquidity absorb नहीं होने के बाद OMO bond sales का सहारा लिया गया।

आगे RBI liquidity की स्थिति के अनुसार अन्य कदम भी उठा सकता है। RBI Governor Sanjay Malhotra ने कहा है कि liquidity management के लिए केंद्रीय बैंक के पास कई विकल्प मौजूद हैं और कोई भी विकल्प पूरी तरह बाहर नहीं है।

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